Janmashtami Festival 2026: इस बार जन्माष्टमी पर्व पर पांच योग लग रहे हैं। ये योग सर्वार्थ सिद्धि, मित्र योग, त्रिग्रही और मानस योग हैं। जन्माष्टमी पर्व पर रात्रि 23:26 बजे चन्द्रमा उदय होंगे। शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र के आचार्य शिवकुमार शर्मा के अनुसार इस बार जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर दिन शुक्रवार को बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ योगों में मनाया जाएगा।
रोहिणी नक्षत्र का योग बना रहा जयंती योग
रोहिणी नक्षत्र का योग होने से यह जयंती योग बन गया है। यद्यपि रोहिणी नक्षत्र रात्रि 23:03 बजे समाप्त हो रहा है। किंतु अष्टमी तिथि में रोहिणी नक्षत्र उदयकालीन और प्रदोष व्यापिनी होने से यह जयंती योग बन गया है।
इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग,मित्र योग, और शाम को रात्रि 11:30 बजे से गोचर में त्रिग्रही योग एवं मानस योग बन रहा है।
उपरोक्त शुभ योगों में भगवान कृष्ण जी का जयन्ती जन्मोत्सव मनाना एक शुभ और पुण्यदायक योग है। अब से पहले जयंती योग योग 2023 में पड़ा था। प्रत्येक तीन चार वर्षो में एक बार यह योग बनता है।
भाद्रपद कृष्ण पक्ष में षष्ठी तिथि का क्षय हो गया है। इसलिए चंद्रमा थोड़ा पहले उदय होंगे।
चंद्रउदय रात्रि 11:26 बजे होगा।
शास्त्रों के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म वृषभ लग्न में निशीथकाल में हुआ था। भगवान कृष्ण की जन्म के समय रात्रि 10:30 बजे से मध्य रात्रि 12:05 तक चंद्रमा उच्च राशि वृषभ में रहेंगे और स्थिर लग्न वृषभ लग्न रहेगा, जो भक्तों की मनोकामना को पूरा करेंगे।
जैसे दिन में अभिजीत मुहूर्त का विशेष महत्व है जो बहुत ही पुण्यदाई मुहूर्त होता है ।उसी प्रकार निशीथ काल में जन्माष्टमी और दीपावली पूजन का मध्य रात्रि अर्थात निशीथ काल बहुत ही उत्तम मुहूर्त होता है। इस अवधि में जन्माष्टमी और दीपावली पर्व का मानना बहुत शुभ होता है।
जन्माष्टमी पर कृष्ण जनम के समय वृषभ लग्न
शास्त्रों के विवरण के अनुसार जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म के समय का वृषभ लग्न है यह स्थिर लग्न होता हैऔर दीपावली पर भी रात्रि निशीथ काल में सिंह लग्न होता है यह भी स्थिर लग्न होता है जो घर में सुख समृद्धि एवं लक्ष्मी दायक होते हैं।
गोकुल ,वृंदावन आदि ब्रज क्षेत्र में रात्रि 11:30 बजे के बाद 1:00 बजे तक भगवान कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसमें बाल कृष्ण जी का पंचामृत आदि से विशेष स्नान, पूजन और विशिष्ट पदार्थों का भोग लगाया जाएगा।
इस दिन प्रातःकाल से ही भगवान कृष्ण जी का विशेष श्रृंगार करें।घर में पंचामृत आदि स्नान कराएंऔर विशेष पूजन सामग्रियों से पूजा करें।
विशेष पूजा मध्य रात्रि को होगी
ओम् नमो भगवते वासुदेवाय।
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवाय।
इन मंत्रों का जाप करें।
इनके अतिरिक्त गोपाल सहस्त्रनाम ,विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।

