Wednesday, June 3, 2026
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होर्मुज स्ट्रेट में अकेला पड़ा अमेरिका, UK से जापान तक ने खींचे हाथ, ट्रंप ईरान से जबरन युद्ध के लिए कर रहे मजबूर?

 ट्रंप के होर्मुज के नाकेबंदी के फैसले के बाद दुनियाभर में तेल की कीमते बढ़ गई हैं। ट्रंप का ये फैसला नाटो और अपने सहयोगियों से गुस्सा होने की वजह से है। वो तेल का दाम बढ़ाकर अपने सहयोगियों को सजा देना चाहते हैं। अमेरिका के हर सहयोगी ने होर्मुज में हाथ डालने से इनकार कर दिया है।

डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कदम का मकसद ईरानी जहाजों की आवाजाही रोकना है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वो जहाज जो ईरान को टोल चुका रहे हैं उन्हें पकड़ा जाए चाहे वो किसी भी देश के हैं। चीन जा रहे एक जहाज ने ट्रंप की चेतावनी को ताक पर रखते हुए होर्मुज पार कर लिया है और हमारी जानकारी के मुताबिक अमेरिकी सेना ने उसे नहीं रोका है। लेकिन ट्रंप चाहते हैं कि होर्मुज खुलवाने के लिए दुनिया के देश आएं और ईरान से झगड़ा करें।

हालांकि दुनिया के ज्यादातर देशों ने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से साफ इनकार कर दिया है। इसके बजाय अपने ऊर्जा कार्गो को सुरक्षित करने के लिए कई देश स्वतंत्र रूप से कदम उठा रहे हैं। जैसे भारत और चीन जैसे देश सीधे ईरानी लीडरशिप से बात कर रहे हैं। लेकिन इस नाकाबंदी के जरिए ट्रंप शायद कई अन्य देशों को भी मध्य-पूर्व संकट में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं।

होर्मुज की घेराबंदी करने का US का मकसद क्या?

हॉर्मुज स्ट्रेट एक संकरा समुद्री मार्ग है जिसका एक हिस्सा सिर्फ करीब 33 किलोमीटर चौड़ा है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल तेल व्यापार का 20 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से होता था। खाड़ी देश जैसे सऊदी, यूएई, कतर और खुद ईरान भी इसी रास्ते से अपने एनर्जी का निर्यात करते हैं। भारत, चीन समेत एशिया के करीब करीब सभी देश इस समुद्री रास्ते पर ऊर्जा आपूर्ति के लिए निर्भर हैं। भारत का 90% LPG आयात भी ईरान और ओमान के बीच मौजूद इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। ईरानी हमलों में अभी तक 24 जहाजों को नुकसान पहुंचा है।अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोमवार को साफ किया है कि यह नाकेबंदी सिर्फ “ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने या उनसे बाहर निकलने वाले सभी देशों के जहाजों पर बिना किसी भेदभाव के लागू की जाएगी” और उन देशों के जहाजों की आवाजाही की आजादी सुनिश्चित की जाएगी जो ईरान के अलावा दूसरे बंदरगाहों से आ-जा रहे हैं। रॉयटर्स ने यह भी बताया कि नाकेबंदी शुरू होने से पहले ही तेल के टैंकरों ने एक बार फिर “जलसंधि से दूर रहना” शुरू कर दिया है।

us warship in hormuzट्रंप कैसे दुनिया को होर्मुज के झगड़े में घसीटने की कर रहे कोशिश?

ट्रंप के होर्मुज के नाकेबंदी के फैसले के बाद दुनियाभर में तेल की कीमते बढ़ गई हैं। ट्रंप का ये फैसला नाटो और अपने सहयोगियों से गुस्सा होने की वजह से है। वो तेल का दाम बढ़ाकर अपने सहयोगियों को सजा देना चाहते हैं। अमेरिका के हर सहयोगी ने होर्मुज में हाथ डालने से इनकार कर दिया है। ट्रंप ने होर्मुज की सुरक्षा के लिए एक संयुक्त नौसैनिक टास्क फोर्स बनाने की अपील की थी जिसे उनके नाटो सहयोगियों ने ही सिरे से खारिज कर दिया। जबकि भारत और चीन जैसे देशों ने दूसरा रास्ता अपनाया है। उदाहरण के लिए चीन और भारत ने अपने जहाजों के सुरक्षित गुजरने के लिए सीधे ईरान के साथ तालमेल बिठाया है। चीन प्रतिबंधों से बचने के जटिल नेटवर्क के जरिए रोजाना लगभग 1.5 से 1.6 मिलियन बैरल तेल आयात करता रहा। चीन को ईरान के ‘होर्मुज टोल’ से भी फायदा हुआ है जिसमें अमेरिकी डॉलर के बजाय चीनी मुद्रा युआन में भुगतान स्वीकार किया जा रहा है। भारत ने तेहरान के साथ द्विपक्षीय समझौते किए है ताकि उसके टैंकरों को वहां से गुजरने की अनुमति मिल सके। भारत और ईरान के नेताओं के बीच कई राउंड की बात हुई है। जापान और दक्षिण कोरिया ने भी यही किया है।

होर्मुज में दुनिया को फंसाने की कोशिश नाकाम!

ऐसे में एकतरफा रूप से नाकेबंदी लागू करके ट्रंप इन देशों को और दुनिया भर के ऊर्जा उपभोक्ताओं को युद्ध में घसीटने की भी कोशिश कर रहे हैं। इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को कहा कि दबाव चाहे जितना भी हो ब्रिटेन को न तो ईरान के साथ युद्ध में घसीटा जाएगा और न ही वह होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी में शामिल होगा। जापान और ब्रिटेन ने भी यही रुख अपनाया है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के प्रयासों में हिस्सा लेने को तैयार हैं लेकिन ऐसा वे तभी करेंगे जब लड़ाई खत्म हो जाएगी।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी सोमवार को ट्वीट करके साफ कर दिया है कि फ्रांस और ब्रिटेन मिलकर ऐसे देशों का एक सम्मेलन आयोजित करेंगे जो ईरान युद्ध में शामिल देशों से पूरी तरह अलग होंगे ताकि एक बहुराष्ट्रीय मिशन के जरिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने जंग की बात को साफ खारिज करते हुए डिप्लोमेसी के जरिए ऐसा करने की बात कही है। जिसका मतलब ये है कि अमेरिका अब अकेला है और होर्मुज में फंसा नजर आ रहा है।

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