जम्मू। अयोध्या के राम मंदिर और बदरीनाथ धाम में चढावा घोटाला के बाद अब श्री माता वैष्णो देवी श्राइन में 20 टन चांदी के चढ़ावे में गबन का आरोप है। एफआईआर दर्ज न होने पर जम्मू की एक अदालत ने 29 जुलाई को रिकॉर्ड के साथ जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। इससे हड़कंप मच गया है।
चढ़ावा घोटाले मामला कोर्ट पहुंच गया
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा घोटाला मामले के बाद देश के प्रसिद्ध पावन धामों में चढ़ावा घोटालों की परते खुल रही हैं। अब एक और प्रसिद्ध धाम जम्मू-कश्मीर स्थित श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में अरबों रुपये का चढ़ावा धोटाला मामला सामने आया है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन में 500 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ‘नकली चांदी’ चढ़ावे के विवाद ने तूल पकड़ा है। इस चढ़ावा घोटाले मामला कोर्ट पहुंच गया है। जम्मू के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) मुनीश कुमार मनहास की अदालत ने क्राइम ब्रांच की लचर कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाते हुए जांच अधिकारी को संबंधित सभी रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई अब 29 जुलाई 2026 को होगी।
20 टन चांदी में 6 प्रतिशत असली होने का दावा
पूरा विवाद उन चौंकाने वाली रिपोर्ट्स के बाद आया, जिसमें दावा किया था कि माता के दरबार में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई करीब 20 टन चांदी (जिसकी कीमत लगभग 550 करोड़ रुपये आंकी गई है) को टेस्टिंग, मेल्टिंग (गलाने) और प्रोसेसिंग के लिए भेजा था। जब इसकी शुद्धता की जांच हुई, तो इसमें केवल 6 प्रतिशत असली चांदी पाई गई। बाकी की 95 फीसदी चांदी ‘नकली’ और मिलावटी थी। जिसमें कैडमियम, लोहा और अन्य अशुद्ध धातुएं मिली थीं। याचिकाकर्ता वकील दीपक शर्मा ने सवाल उठाया कि क्या देशभर से आने वाले माता के लाखों भक्त नकली चांदी चढ़ा सकते हैं? या फिर इसके पीछे चढ़ावे की अदला-बदली और गबन की कोई आपराधिक साजिश काम कर रही है।
9 मई 2026 को दी गई शिकायत
वरिष्ठ वकील दीपक शर्मा द्वारा दायर एक याचिका पर विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने निर्देश दिया है। उन्होंने पुलिस महानिरीक्षक (IGP) क्राइम ब्रांच जम्मू और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) आर्थिक अपराध शाखा के समक्ष एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी। 9 मई 2026 को दी गई इस शिकायत में माता वैष्णो देवी श्राइन में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित की गई चांदी में बड़े पैमाने पर मिलावट, हेरफेर, रिकॉर्ड में हेराफेरी, गबन की व्यापक जांच के लिए एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की गई।
क्राइम ब्रांच की स्टेटस रिपोर्ट पर सवाल क्राइम ब्रांच द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई न करने पर शिकायतकर्ता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर क्राइम ब्रांच ने जो स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। जिसमें कहा कि शिकायत को पहले प्रशासनिक मंजूरी के लिए क्राइम मुख्यालय श्रीनगर भेजा था।

