Cyber Fraud News: ग्वालियर में साइबर अपराधियों ने देश के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली साइबर ठगी को अंजाम दिया। देश के जाने-माने वित्तीय मामलों के जानकार, 70 वर्षीय वरिष्ठ चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) और चेंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव अधिकारी अशोक विजयवर्गीय को ‘दिव्या सिंह’ से दोस्ती भारी पड़ी। दिव्या सिंह ने ऑनलाइन क्रिप्टो करेंसी निवेश के नाम पर महाठगी कर ली। शातिर ठगों ने सीए को बिटकाइन और यूएसडीटी (USDT) में निवेश कर बंपर मुनाफे का लालच दिया और जीवनभर की जमा-पूंजी,21 करोड़ 5 लाख 92 हजार रुपये हड़प लिए। सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद दिल्ली तक हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस के साइबर एक्सपर्टस दिव्या सिंह का पता लगाने में जुटे हुए हैं।
व्हाट्सएप कॉल और ‘दिव्या सिंह’ का जाल
ठगी के खेल की शुरुआत पिछले साल नवंबर में एक अनजान व्हाट्सएप कॉल से हुई। अशोक विजयवर्गीय ने साइबर सेल को दी शिकायत में बताया कि उनके पास मोबाइल नंबर 8151931249 से व्हाट्सएप कॉल आई। फोन करने वाली युवती ने अपना परिचय ‘दिव्या सिंह’ के रूप में दिया। बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ने पर उसने खुद को क्रिप्टो ट्रेडिंग विशेषज्ञ बताते हुए ऑनलाइन निवेश करने पर कई गुना मुनाफे का झांसा दिया। इसके बाद उसने एक अन्य नंबर 7092164831 और एक विदेशी नंबर 1(516) 7291 से संपर्क साधकर सीए को फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट की लिंक भेजी। जिसमें यूएसडीटी-बीटीसी ($USDT$-$BTC$) के जरिए निवेश करने के विकल्प थे।
218 दिन की दोस्त को सीए ने 106 बार में 25 बैंक खातों में भेजे रुपये
साइबर ठगों ने इतने अनुभवी और वरिष्ठ चार्टर्ड एकाउंटेंट को एक दिसंबर 2025 से सात जुलाई 2026 तक, यानी पूरे 218 दिनों तक अपने बुने डिजिटल जाल में फंसाए रखा। शुरुआती दौर में सीए विजयवर्गीय ने कुछ रकम निवेश की, तो फर्जी वेबसाइट के डैशबोर्ड पर भारी मुनाफा दिखाई दिया। शुरुआत में कुछ रकम उनके बैंक खाते में वापस आ गई। इस शुरुआती भरोसे के बाद वे ठगों के झांसे में आ गए। उन्होंने महज कुछ महीनों के भीतर 106 बार में देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय ठगों के 25 विभिन्न बैंक खातों में 21.05 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर कर दी।
33.25 करोड़ का दिखा वर्चुअल मुनाफा
सीए विजयवर्गीय ने पुलिस को बताया कि उनके द्वारा निवेश किए गए 21.05 करोड़ रुपये पोर्टल पर मुनाफे के साथ बढ़कर कुल 33.25 करोड़ रुपये (करीब 12 करोड़ का लाभ) प्रदर्शित हो रहे थे। ठगी का खुलासा तब हुआ जब उन्होंने इस बड़ी रकम को अपने बैंक खाते में निकालने (विड्रॉल करने) का प्रयास किया। लेकिन उनका ट्रांजैक्शन ‘डिनाई’ (रद्द) हो गया। उसके बाद उनको अपने साथ ठगी का अहसास हुआ।

