नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की एसआईटी जांच कर रही है। एसआईटी को राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में भारी वित्तीय अनियमितताओं के साथ दान में मिले गहनों में गड़बड़ियों के के सबूत मिले हैं। एसआईटी की जांच में सामने आया कि श्रद्धालुओं द्वारा राम मंदिर में दान किए गए गहनों को गलाकर उनमें हेरफेर की गई।
जांच टीम अपना काम पूरा कर देर रात लखनऊ लौटी
एसआईटी अयोध्या में चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच पूरी कर देर रात लखनऊ लौट आई है। टीम ने ट्रस्ट के गठन से अब तक के करीब पांच साल के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों, लेनदेन और ऑडिट दस्तावेजों की पड़ताल की है। एसआईटी ने जांच के दौरान ट्रस्ट के सभी वित्तीय दस्तावेज कब्जे में लिए हैं।
वित्तीय लेनदेन में भारी खामियां सामने आई
अयोध्या राम मंदिर के वित्तीय जांच में ऑडिट और लेनदेन में भारी खामियां सामने आई हैं। एसआईटी के अनुसार, दान राशि में हेरफेर गिनती के दौरान किए जाने की आशंका है। जिससे वास्तविक दान राशि और संभावित गबन का आकलन करना चुनौतीपूर्ण है।
दान के गहनों में गड़बड़ी, जिम्मेदारों पर सवाल
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए लाखों-करोड़ों रुपये के कीमती गहने हैं। दान देने वाले श्रद्धालुओं ने सवाल उठाए हैं। ऑडिट में इसका जिक्र नहीं है। एसआईटी इस पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है।
चंपत राय के इशारे पर टिन्नू देखता था कार्य
अयोध्या राम मंदिर में आने वाले दान का पूरा काम चंपत राय के इशारे पर टिन्नू देखता था। सूत्रों की माने तो दान में मिले गहनों को गलाया जाता था। इसके बाद गलाए गए गहनों को इधर से उधर कर दिया जाता था। एसआईटी को सुबूत व गवाह तो मिलेलेकिन देखना यह होगा कि इसको वह साबित कैसे करते हैं। अगर यह सही है तो इसमें चंपत राय की जिम्मेदारी तय होगी।

