अयोध्या। अयोध्या के श्रीराम मंदिर चंदा घोटाला मामले में ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित विशेष जांच दल ने एफआईआर दर्ज कराई है। इनमें आठ लोगों को नामजद किया है। जबकि चंपत राय जैसे नाम हटा दिए गए हैं। आरोपियों के खिलाफ श्रीराम जन्मभूमि थाने में पहली एफआईआर (अपराध संख्या 90/2026) दर्ज की गई है। मुकदमा दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि अन्य पांच से हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है।
लिखित शिकायत में ये नाम हैं शामिल
ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर दर्ज इस मुकदमे में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्रीराम शंकर यादव उर्फ टिन्नू (ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के ड्राइवर) को नामजद किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए टिन्नू, लवकुश और अनुकल्प को गिरफ्तार कर लिया है। इस एफआईआर में चंपत राय या डॉ. अनिल मिश्रा जैसे बड़े पदाधिकारियों के नाम शामिल नहीं हैं। लेकिन उनके इस्तीफे लिखवा लिए गए हैं।
जानिए क्या है पूरा मामला
पूरा मामला जून के पहले सप्ताह (7 जून) में उस समय गरमाया था, जब सपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने मंदिर के चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पारदर्शिता की मांग उठाई। विवाद बढ़ता देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून को लखनऊ मंडल के आयुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था।
एसआईटी ने 23 जून को शासन को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी
एसआईटी ने 23 जून को शासन को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें बेहद कड़ी संस्तुतियां की गई थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि एसआईटी की निष्पक्ष जांच से ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ होकर रहेगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई पर विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि वह एफआईआर से संतुष्ट हैं, लेकिन जिनका नाम इसमें नहीं है, उनकी भी जांच होनी चाहिए। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।

