रक्षाबंधन पर्व: इस वर्ष श्रावण शुक्ल पूर्णिमा 28 अगस्त, दिन शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व पूरे दिन मनाया जाएगा। शुक्रवार को शतभिषा नक्षत्र होने से सौम्य योग का निर्माण हो रहा है। शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केन्द्र के पंडित शिवकुमार शर्मा के अनुसार यद्यपि उस दिन पूर्णिमा प्रात:काल 9:47 बजे तक है। शास्त्रों के अनुसार रक्षाबंधन मध्याह्न एवं अपराह्न व्यापिनी पूर्णिमा तिथि में मनाया जाता है। जबकि 27 अगस्त को पूर्णिमा प्रातः 9:08 बजे से आरंभ हो रही है। किंतु उसके पश्चात रात्रि 9:27 तक भद्राकाल रहेगा। भद्राकाल में राखी बांधना अशुभ होता है और 28 अगस्त को यद्यपि पूर्णिमा प्रातः 9:08 तक है .लेकिन शास्त्र में उल्लेख है जब पहले दिन अपराह्न में पूर्णिमा हो किंतु भद्राकाल हो तो दूसरे दिन पूर्णिमा अपराह्न व्यापिनी भी ना हो और त्रिमुहुर्त व्यापिनी अर्थात 2 घंटे 24 मिनट ही क्यों ना हो रक्षाबंधन पर्व मानना चाहिए।
त्रिमुहुर्त व्यापिनी पूर्णिमा मिल रही हो तो…
पुरुषार्थ चिंतामणि के अनुसार त्रिमुहुर्त व्यापिनी पूर्णिमा मिल रही हो तो जो भद्रा काल से भी युक्त नहीं है। उसी दिन रक्षाबंधन पूरे दिन मनाते हैं। इसलिए रक्षाबंधन 28 अगस्त को ही सौम्य में योग में मनाया जाएगा।
राखी बांधने के शुभ मुहूर्त
28 अगस्त को रक्षाबंधन प्रातः काल सूर्य उदय से ही आरंभ हो जाएगा।
प्रात:काल 5:10 बजे से 7: 28 बजे तक, सिंह लग्न (उत्तम मुहुर्त)
7:28 बजे से 9:45 बजे तक कन्या लग्न (शुभ मुहूर्त)
9:45 से 10:30 बजे तक तुला लग्न भी श्रेष्ठ है। प्रातः 10:30 बजे से 12:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस अवधि में राखी नहीं बांधनी चाहिए।
12:00 बजे के पश्चात वृश्चिक, धनु और मकर लग्न में शाम तक बहिनें अपने भाइयों की कलाई में राखी बांध सकेंगी।
राखी बांधने का मंत्र
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वाम् प्रति बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
इसका भावार्थ यह है कि जिस रक्षा-सूत्र से महाबली दानवराज बलि को बाँधा गया था, उसी रक्षा-सूत्र से मैं तुम्हें बाँधती हूँ। हे रक्षासूत्र! तुम अपने संकल्प से विचलित न होना, रक्षा करना। मेरे भाई की आयु की रक्षा करना , उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि से युक्त करना।
राखी बांधने की सरल विधि
बहिनें ध्यान रखें कि राखी बांधते समय पहले भाई के माथे पर रोली का तिलक लगाएं, अक्षत लगाएं और फिर ऊपर लिखे हुए मंत्र को बोलते हुए दाहिनी कलाई पर राखी बांधे। भाई का मुंह मीठा कराएं। भाई भी अपनी बहनों को श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार उपहार दें और उनका आशीर्वाद लें।

