Tuesday, July 21, 2026
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ईसबगोल की खेती से किसान हो रहे मालामाल, लोकप्रिय हो रही औषधीय फसल

Ghaziabad News: किसान अब ऐसी खेती की तलाश में हैं, जिससे लागत कम और अधिक मुनाफा कमाए। ईसबगोल की खेती किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। ईसबगोल एक औषधीय फसल है। जिसकी मांग देश के अलावा विदेशों में बनी रहती है। खास यह है कि ईसबगोल खेती में अपेक्षाकृत खर्च कम आता है और ईसबगोल फसल तैयार होने के बाद किसानों को आर्थिक लाभ मिलता है।
क्या है ईसबगोल और क्यों बढ़ी मांग?
ईसबगोल एक औषधीय पौधा है। जिसका उपयोग आयुर्वेदिक और आधुनिक दवाओं में होता है। इसके बीजों पर मौजूद भूसी में पानी सोखने की क्षमता होती है। इसका उपयोग पाचन संबंधी उत्पादों और स्वास्थ्यवर्धक दवाओं में होता है। स्वास्थ्य जागरूकता के कारण बाजार में ईसबगोल की मांग बढ़ रही है।
बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त
ईसबगोल की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेत में जल निकासी की व्यवस्था होना जरूरी है। अधिक नमी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है। मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 के बीच रहने पर बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है। इसकी बुवाई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के दूसरे सप्ताह तक की जाती है। ईसबगोल के बीज आकार में छोटे होते हैं, इसलिए इन्हें रेत के साथ मिलाकर बोते हैं। बुवाई से पहले बीजों का फफूंदनाशक दवा से उपचार जरूरी है। जिससे पौधों को शुरुआती रोगों से बचाया जा सके। खेत की अच्छी तैयारी और भुरभुरी मिट्टी भी बेहतर अंकुरण में मदद करती है। अच्छी पैदावार के लिए समय-समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण जरूरी होता है। सामान्य परिस्थितियों में पूरी फसल अवधि के दौरान तीन से चार सिंचाई पर्याप्त हैं। जैविक खेती करने वाले किसान गोबर खाद और वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करते हैं। खेत में अधिक नमी जमा न होने देना जरूरी है, क्योंकि इससे रोगों का खतरा बढ़ता है।
कब तैयार होती है फसल?
ईसबगोल फसल आमतौर पर 110 से 130 दिनों में तैयार होती है। पौधों की बालियां पूरी तरह पक जाएं, तब कटाई करनी चाहिए। कटाई के समय बारिश नहीं होनी चाहिए। ऐसा होने पर बीज और भूसी दोनों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ये होती है कमाई?
कृषि जानकारों के अनुसार एक हेक्टेयर क्षेत्र में ईसबगोल की खेती से 10 से 15 क्विंटल तक उत्पादन लिया जा सकता है। बाजार में इसके बीजों की कीमत 8,500 रुपये से लेकर 15 हजार रुपये प्रति क्विंटल है। ईसबगोल की भूसी की मांग और कीमत दोनों होती हैं। जिससे किसानों की कुल आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। यही वजह है कि इसे कम लागत और अधिक लाभ वाली फसलों में माना जाता है।

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