Ghaziabad News : आज से गाजियाबाद सहित दिल्ली एनसीआर में ट्रांसपोर्टर तीन दिन की हड़ताल पर रहेंगे। तीन दिन तक प्रस्तावित इस ट्रांसपोर्ट की हड़ताल का असर रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों पर पड़ने की संभावना है। गाजियाबाद, दिल्ली और एनसीआर सहित आसपास के राज्यों में बड़े व्यावसायिक वाहनों का संचालन प्रभावित होने से इसका असर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर पड़ने की आशंका है।
हरित शुल्क और बीएस-4 वाहनों के प्रवेश प्रतिबंध का विरोध
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने राजधानी दिल्ली में कामर्शियल वाहनों पर बढ़ाए हरित शुल्क और बीएस-4 वाहनों के प्रवेश प्रतिबंध के विरोध में आज से तीन दिन की हड़ताल का आह्वान किया है। संगठन कहना है कि आज से दिल्ली, उत्तरप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 126 परिवहन संगठन ट्रांसपोर्टर की हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं।
सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो हड़ताल आगे भी जारी रखी जाएगी
गाजियाबाद ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष सौदान गुर्जर का कहना है कि हड़ताल शुरू होते ही वाहन जहां होंगे, वहीं खड़े कर दिए जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो हड़ताल आगे भी जारी रखी जाएगी। अनुमान है कि गाजियाबाद में हड़ताल से प्रतिदिन 25 से 30 हजार व्यावसायिक वाहनों का संचालन प्रभावित होने की संभावना है। इनमें सात से 10 हजार वाहन खाद्य सामग्री, डेयरी उत्पाद और दवाओं जैसी जरूरी वस्तुओं की सप्लाई करने वाले हैं। ऐसे में यदि ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल सफल रही तो मंडियों से लेकर खुदरा बाजार तक इसका असर होगा।
बिना किसी आधार के बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध
ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि बिना किसी आधार के बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध लगाया है और हरित शुल्क में बढ़ोतरी से माल ढुलाई लागत बढ़ रही है। ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि इस दौरान करीब 50 हजार से अधिक भारी वाहन दिल्ली में प्रवेश नहीं करेंगे। इन वाहनों में औद्योगिक सामान, निर्माण सामग्री, किराना और दैनिक उपयोग की वस्तुएं ले जाने वाले ट्रक शामिल हैं।
फल,सब्जी और डेयरी उत्पादों पर असर
ट्रांसपोर्टर हड़ताल का असर फल, सब्जी और डेयरी उत्पादों की सप्लाई पर भी पड़ने की संभावना है। जिससे आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऑल इंडिया गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील अत्री ने बताया कि राजधानी दिल्ली में प्रवेश करने वाले मालवाहक वाहनों के चालकों और संचालकों को लंबे समय से समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि बिना स्पष्ट कारण के वाहनों के चालान काट दिए जाते हैं। विभिन्न नियमों के नाम पर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। ट्रांसपोर्ट संगठनों की प्रमुख मांगों में बीएस-6 वाहनों पर लगाए ग्रीन टैक्स को समाप्त करना, बीएस-4 वाहनों के राजधानी दिल्ली प्रवेश पर लगी रोक हटाना तथा कथित चालानों पर रोक लगाना शामिल है। संगठनों का कहना है कि मौजूदा नियमों के कारण ट्रांसपोर्ट व्यवसाय लगातार घाटे में जा रहा है और छोटे ऑपरेटर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
10 हजार वाहन प्रतिदिन इन जरूरी वस्तुओं की सप्लाई राजधानी दिल्ली में करते हैं
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार प्रतिदिन विभिन्न राज्यों से बड़ी मात्रा में दूध, फल और सब्जियां राजधानी में पहुंचाया जाता है। अकेले करीब 10 हजार वाहन प्रतिदिन इन जरूरी वस्तुओं की सप्लाई राजधानी दिल्ली में करते हैं। हड़ताल के दौरान इन वाहनों की आवाजाही प्रभावित होगी। ऐसे में फल और सब्जी मंडियों में आवक कम होने और कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि यदि हड़ताल लंबी चली तो इसका असर एनसीआर की थोक मंडियों,खुदरा बाजारों पर होगा। वहीं आम लोगों को रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के लिए अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ सकती है।

