कोलकाता। भाजपा की सरकार बनने के बाद पश्चिम बंगाल में काफी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पश्चिम बंगाल में सामाजिक और राजनैतिक तालमेल का बेहद ऐतिहासिक और दूरगामी संदेश दिखाई दे रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जारी एक कड़े निर्देश के बाद अब राज्य के सभी मदरसों में पढाई शुरू होने से पहले प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य कर दिया है। कोलकाता स्थित मदरसा शिक्षा निदेशालय के इस आदेश की धमक अब गांवों से लेकर महानगर के मदरसों तक सुनाई दे रही है।
निरस्त हुईं पुरानी प्रथाएं
कोलकाता मुख्यालय से जारी आदेश के बाद अब प्रदेश के सभी मदरसों में बदलाव का अद्भुत नजारा दिखाई दे रहा है। यूपी के योगी मॉडल पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के फैसले मुख्यधारा से जुड़ने का जरिया बन रहे हैं। बता दें कि राज्य के मदरसा शिक्षा निदेशालय की तरफ से जारी आदेश की प्रति के अनुसार, अब पुरानी सरकार के उन सभी आदेशों और प्रथाओं को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है जो अब तक चली आ रही थीं।
सुबह प्रार्थना सभा के दौरान छात्रों को राष्ट्रगीत गायन अनिवार्य
नई सरकार के नए नियमों के तहत राज्य के सभी सरकारी मदरसे, सहायता प्राप्त मदरसे, मान्यता प्राप्त गैर-अनुदानित मदरसे, मदरसा शिक्षा केंद्र और शिशु शिक्षा केंद्र जैसी संस्थानों में सुबह प्रार्थना सभा के दौरान छात्रों को राष्ट्रगीत गायन अनिवार्य कर दिया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुद सोशल मीडिया पर इस फैसले को साझा किया, जिसमें शिक्षा विभाग द्वारा बीती 13 मई को सरकारी स्कूलों के लिए लागू किया था। जब सरकारी अन्य स्कूलों में हो सकता है, तो मदरसों में क्यों नहीं?
प्रबुद्ध वर्ग और चाय की दुकानों पर बहस का दौर शुरू
इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल के प्रबुद्ध वर्ग और चाय की दुकानों पर बहस का दौर शुरू हुआ। अल्पसंख्यकों की धार्मिक आजादी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अल्पसंख्यक कार्य एवं मदरसा शिक्षा विभाग के मंत्री खुदीराम टुडू का एक बड़ा बयान रेडियो पर प्रसारित हुआ है।
मंत्री खुदीराम टुडू ने कहा कि “बंगाल में कुछ सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां संथाली भाषा पढ़ाई जाती है। जब उन जनजातीय और भाषाई स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य है, तो मदरसों में इसे लागू करने में कोई समस्या नहीं होनी है।

