Tuesday, July 21, 2026
Homeशहरगाजियाबादअवैध कालोनियों के खिलाफ जीडीए वीसी की सख्ती और प्रवर्तन टीमों के...

अवैध कालोनियों के खिलाफ जीडीए वीसी की सख्ती और प्रवर्तन टीमों के एक्शन का सच

Ghaziabad GDA News: गाजियाबाद में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ जीडीए का बुलडोजर भले ही लगातार चल रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कई सवाल खड़े कर रही है। जिन स्थानों पर ध्वस्तीकरण हो चुका है, वहां दोबारा अवैध प्लॉटिंग शुरू होने और कई इलाकों में आज तक कार्रवाई नहीं होने से प्रवर्तन व्यवस्था की प्रभावशीलता और कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित है, या फिर अवैध कॉलोनियों के पूरे नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाने में कहीं न कहीं चूक हो रही है?
बिना स्वीकृत के हो रहा अवैध कॉलोनियों का निर्माण
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष (वीसी) नन्दकिशोर कलाल के निर्देश पर जनपद में अवैध कॉलोनियों और बिना स्वीकृति किए जा रहे निर्माण कार्यों के खिलाफ लगातार बुलडोजर कार्रवाई जारी है। पिछले कई महीनों से जीडीए की प्रवर्तन टीम विभिन्न जोन क्षेत्रों में अभियान चलाकर अवैध कॉलोनियों में सड़कें, बाउंड्री वॉल, प्लॉटिंग और अन्य निर्माण कार्य ध्वस्त कर रही है। विशेष रूप से जून महीने के दौरान प्राधिकरण द्वारा चलाए गए ध्वस्तीकरण अभियान ने काफी सुर्खियां बटोरीं और कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। जून के पहले सप्ताह में ही दो जून को प्रवर्तन जोन-03 में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 53 बीघे (लगभग 1.19 लाख वर्गमीटर) क्षेत्रफल में विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों और निर्माणों पर बुलडोजर चलाया। ग्राम डासना देहात स्थित कल्लूगढ़ी क्षेत्र में खसरा संख्या 1618, 1619, 1620, 1627, 1628, 1629 और 1630 पर लगभग 44 बीघे क्षेत्रफल में विकसित की जा रही अवैध कॉलोनी के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया। इसके अलावा खसरा संख्या 8 और 9, मटियाला से कनौजा जाने वाले मार्ग पर लगभग 9000 वर्गमीटर क्षेत्रफल में किए जा रहे अनधिकृत विकास पर भी कार्रवाई की गई। जीडीए ने अभियान जारी रखते हुए 6 जून को प्रवर्तन जोन-4 के अंतर्गत महरौली क्षेत्र में महागुन ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के पास लगभग 6600 वर्गगज भूमि पर की जा रही अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त कर दिया। प्रताप विहार सेक्टर-11 में एक भूखंड पर जीडीए के निर्धारित सेटबैक नियमों का उल्लंघन कर किए गए निर्माण को भी ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के दायरे में सिद्धार्थ विहार के डूब क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियां और उनसे संबंधित प्लॉटिंग के निर्माण भी आए।
हिंडन डूब क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और बाउंड्री वॉल
हिंडन नदी के समीप डूब क्षेत्र में की जा रही अवैध प्लॉटिंग, बाउंड्री वॉल, बिल्डर कार्यालय और अन्य अनाधिकृत निमार्णों पर भी बुलडोजर चलाया गया। जीडीए ने 17 जून को प्रवर्तन जोन-2 के अंतर्गत मुरादनगर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान करीब 24 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध प्लॉटिंग और निर्माण कार्यों को ध्वस्त किया गया। इसके अलावा भी कुछ अन्य जगहों पर कार्रवाई के दावे किए गए।
जमीनी स्तर पर स्थिति नियंत्रण में नहीं
हालांकि, इन अभियानों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में दिखाई नहीं दे रही है। कई ऐसे क्षेत्र सामने आए हैं, जहां जीडीए की कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद दोबारा अवैध प्लॉटिंग शुरू हो गई है। कुछ स्थानों पर फिर से सड़कें बनाई जा रही हैं, प्लॉटों की पैमाइश की जा रही है और खरीदारों को प्लॉट बेचने का सिलसिला भी जारी है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि यदि कार्रवाई के बाद प्रभावी निगरानी होती, तो दोबारा अवैध गतिविधियां शुरू कैसे हो गईं।
कई इलाकों में लंबे समय से अवैध कॉलोनियां विकसित
स्थिति का दूसरा पहलू यह भी है कि जनपद के कई इलाकों में लंबे समय से अवैध कॉलोनियां विकसित हो रही हैं, लेकिन वहां अब तक जीडीए का बुलडोजर पहुंचा ही नहीं है। कुछ क्षेत्रों में खुलेआम कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग की जा रही है, सड़कें और नालियां बनाई जा रही हैं तथा बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी इंतजाम किया जा रहा है, लेकिन संबंधित प्रवर्तन टीम की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही। इसी कारण जीडीए की प्रवर्तन व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि प्राधिकरण का अभियान पूरी तरह निष्पक्ष और व्यापक है, तो फिर कुछ चुनिंदा इलाकों में ही बार-बार कार्रवाई क्यों की जा रही है, जबकि अन्य स्थानों पर अवैध कॉलोनियों का विकास लगातार जारी है। इससे प्रवर्तन टीम की कार्यशैली और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। शहरी विकास से जुड़े जानकारों का मानना है कि केवल ध्वस्तीकरण अभियान चलाना ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ-साथ नियमित निगरानी, अवैध कॉलोनियां विकसित करने वाले भूमाफियाओं के खिलाफ एफआईआर, आर्थिक दंड और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। यदि कार्रवाई के बाद भी दोबारा अवैध प्लॉटिंग शुरू हो जाती है, तो इसका अर्थ है कि निगरानी व्यवस्था में कहीं न कहीं कमी बनी हुई है।
जीडीए को ऐसे क्षेत्रों का दोबारा निरीक्षण कराना चाहिए
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जीडीए को ऐसे क्षेत्रों का दोबारा निरीक्षण कराना चाहिए, जहां पहले ध्वस्तीकरण किया जा चुका है। साथ ही उन स्थानों की भी पहचान कर त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए, जहां अभी तक अवैध कॉलोनियां विकसित हो रही हैं। इससे न केवल भूमाफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा, बल्कि आम लोगों को भी अवैध कॉलोनियों में निवेश करने से बचाया जा सकेगा। अब देखना होगा कि जीडीए का प्रवर्तन विभाग इन सवालों पर किस प्रकार जवाब देता है और क्या आने वाले दिनों में पूरे जिले में समान रूप से कार्रवाई कर अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी रोक लगाने में सफल हो पाता है या नहीं।
दुहाई-मोरटा रोड के आसपास अवैध कॉलोनियों का जाल
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन-2 के अंतर्गत दुहाई नमो रेलवे स्टेशन से मोरटा की ओर जाने वाला इलाका इन दिनों अवैध कॉलोनियों का केंद्र बन चुका है। यहां ‘आदित्य ग्रीन सिटी’ नाम से विकसित की जा रही कॉलोनी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जीडीए द्वारा इस कॉलोनी में दो बार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का दावा किया जा चुका है और तीसरी बार इसे सूचीबद्ध भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद यहां प्लॉटों की बिक्री खुलेआम जारी है। सर्किल रेट करीब 15,500 रुपये प्रति गज बताया जा रहा है, जबकि प्लॉट 26,000 से 30,000 रुपये प्रति गज तक बेचे जा रहे हैं। कई जगह बाउंड्री वॉल खड़ी हो चुकी हैं और निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है। इन दिनों आदित्य ग्रीन सिटी में बिजली की आपूर्ति के लिए खम्बे लगने शुरू हो गए हैं। चित्र में इन खंबो को देखा जा सकता है। आदित्य ग्रीन सिटी के आसपास ही ‘वृंदावन कॉलोनी’ और ‘खाटू श्याम कॉलोनी’ तेजी से आकार ले रही हैं। वृंदावन कॉलोनी में जहां सर्किल रेट लगभग 12,000 रुपये प्रति गज बताया जा रहा है, वहीं प्लॉट 32,000 से 36,000 रुपये प्रति गज तक बेचे जा रहे हैं। वृंदावन कालोनी में इन दिनों सीमेन्ट वाली रोड़ तैयार कर दी गई है। खाटू श्याम कॉलोनी में भी बिना किसी स्वीकृति के प्लॉटिंग जारी है। जन सहयोग संस्थान के सह सचिव संजय शर्मा ने बीती 17 अप्रैल को प्रमुख सचिव (आवास एवं शहरी नियोजन) को पत्र भेजकर न केवल अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने, बल्कि संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं की भूमिका की जांच कराने की मांग की थी जिस पर जीडीए ने जांच शुरू कर दी है। देखना होगा कि जीडीए इन अवैध कालोनियों पर कड़ा एक्शन लेता है या फिर खानापूर्ति कर शासन को गुमराह किया जाएगा।
कृष्णा एंक्लेव फेज-4 में प्लॉटिंग के साथ बने आशियानें
गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम इलाके में दुहाई बसंतपुर सैंतली के पास खसरा नंबर 940 पर कृष्णा एंक्लेव फेज-4 के नाम से काटी जा रही इस कालोनी में कालोनाइजरों ने लोगों को आकर्षित करने के लिए सीमेंटवाली रोड और बिजली के खम्बों के सहारे बिजली के तारों का जाल भी फैला दिया है। यही वजह है कि लोग यहां प्लॉट खरीदने के साथ ही अपने आशियाने भी बनाने लगे हैं। कृष्णा एंक्लेव फेज-4 कालोनी वैध या अवैध, इसकी जांच किए बिना ही लोग प्लॉट खरीद रहे हैं और जीडीए के संबंधित अभियंता मौन हैं।
भूड़गढ़ी डासना पर उद्योग कुंज के नाम से काटे जा रहे औद्योगिक भूखंड?
जीडीए प्रवर्तन जोन 5 के अंर्तगत भूड़गढ़ी मेन रोड डासना गाजियाबाद में खसरा नम्बर 206, 207, 208, 209 एवं 210 पर ‘उद्योग कुंज’ नाम से कृषि भूमि पर छोटे-बड़े औद्योगिक प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं। ज्ञातव्य है कि किसी भी औद्योगिक क्षेत्र के विकास, भू-उपयोग परिवर्तन, लेआउट स्वीकृति, आधारभूत सुविधाओं के विकास तथा औद्योगिक प्लॉटों के विक्रय हेतु संबंधित विभाग एवं प्राधिकरण से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त किया जाना अनिवार्य होता है। यदि कृषि भूमि को बिना वैधानिक स्वीकृतियों के औद्योगिक प्रयोजन हेतु विकसित कर प्लॉटिंग एवं विक्रय किया जा रहा है तो यह शासन के नियमों एवं निवेशकों के हितों के विपरीत हो सकता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments