Monday, June 15, 2026
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जयपुरिया सनराइज मॉल के गलियारों पर अवैध कब्जों जाल: जीडीए की चुप्पी पर सवाल

गाजियाबाद के अहिंसा खंड इंदिरापुरम स्थित जयपुरिया सनराइज प्लाजा मॉल में कॉरीडोरों पर हुए अवैध कब्जे और स्वीकृत मानचित्र के विपरीत व्यापक निर्माण का मामला स्थानीय स्तर से निकलकर शासन तक पहुंचा लेकिन इसके बावजूद
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के अधिकारियों की उदासीनता कम होने का नाम नहीं ले रही है। बार-बार शिकायतों, निरीक्षणों और ध्वस्तीकरण आदेशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कार्रवाई शून्य बनी हुई है।
शासन तक पहुंचा मामला, फिर भी नहीं टूटी खामोशी: इस पूरे प्रकरण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता संजय शर्मा ने अक्टूबर 2024 से लगातार जीडीए के प्रवर्तन जोन-6 के अधिकारियों से लेकर जीडीए सचिव, उपाध्यक्ष (वीसी), मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव तक को कई चरणों में विस्तृत शिकायतें भेजीं हैं। इन शिकायतों में मॉल के कॉरीडोरों पर अतिक्रमण, अवैध कब्जे और मानचित्र के विपरीत निर्माण का पूरा ब्यौरा दिया गया। इतना ही नहीं, शिकायतों के साथ उन आदेशों और आख्या की प्रतियां भी संलग्न की गईं, जिनमें जीडीए की ओर से कार्रवाई
का आश्वासन दिया गया था। इसके बावजूद न तो किसी बड़े स्तर पर जांच बैठी और न ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई गई। संबंधित अधिकारी महज कागजी खानापूर्ति में ही लगे रहे। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर शासन स्तर तक मामला
पहुंचने के बाद भी जीडीए के अधिकारी निष्क्रिय क्यों बने हुए हैं और जयपुरिया सनराइज मॉल में गंभीर गड़बड़ियों को अनदेखा क्यों किया जा रहा है? कॉरीडोर से दुकानें बनने तक—नियमों की खुली अनदेखी: मॉल के जिन कॉरीडोरों को आम जनता की आवाजाही के लिए छोड़ा गया था, उन्हें व्यवस्थित तरीके से दुकानों में मर्ज कर दिया गया है। एसए और
एसबी ब्लॉकों में अधिकांश गलियारे अब व्यावसायिक उपयोग में हैं। यह बदलाव न केवल स्वीकृत मानचित्रकाउल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा मानकों के भी विपरीत है। इसके अलावा मॉल के ऊपरी हिस्सों में भी बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किए गए हैं। यही नहीं कई प्रतिष्ठित व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी मॉल की अवैध संरचनाओं में संचालित हो रहे हैं, इनमें गुंजन आईवीएफ वर्ल्ड भी शामिल है। निरीक्षण में सही पाई गई शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं: काबिलेगौर है कि प्रवर्तन जोन-6 की टीम ने स्थलीय निरीक्षण के दौरान इन शिकायतों को सही पाया था। प्रारंभिक रिपोर्ट में अवैध निर्माण और अतिक्रमण
को चिन्हित करते हुए ध्वस्तीकरण की सिफारिश भी की गई थी लेकिन इसके बाद कार्रवाई की प्रक्रिया अचानक धीमी पड़ गई। ‘पर्याप्त पुलिस बल नहीं मिलने’ जैसे कारणों का हवाला देकर कार्रवाई टाल दी गई और मामला धीरे-धीरे फाइलों में दबा दिया गया। यह स्थिति तब है जब कई बार ध्वस्तीकरण के आदेश आधिकारिक रूप से जारी किए जा चुके हैं। आदेशों का अंबार, अमल नदारद: 10 अक्टूबर 2025 को प्रवर्तन जोन-6 की ओर से लिखित रूप में आश्वासन दिया गया था कि जयपुरिया मॉल के अतिक्रमण को आगामी ध्वस्तीकरण अभियान में शामिल किया जाएगा। लेकिन इसके बाद तीन महीने से अधिक का समय बीत गया और 2026 की शुरूआत भी हो गई, फिर भी मौके पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हर बार नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर दी जाती है, जबकि वास्तविक कार्रवाई से बचा जाता है। इससे संदेह है कि कहीं विभागीय स्तर पर मिलीभगत तो नहीं है।
अभियंताओं की भूमिका पर गहराते संदेह: जिन अभियंताओं के कार्यकाल में मॉल में अवैध निर्माण और कॉरीडोर पर अवैध कब्जा हुआ, उनकी भूमिका संदिग्ध रही है। वहीं वर्तमान में तैनात अधिकारी भी इस स्थिति को सुधारने में इच्छाशक्ति नहीं दिखा रहे हैं। विभाग के भीतर एक-दूसरे की गलतियों को छिपाने और कार्रवाइ बचने की प्रवृत्ति इस मामले में साफ नजर आती है। राजस्व को नुकसान, फिर भी कार्रवाई नहीं: इतने बड़े स्तर पर हुए अवैध निर्माण से जीडीए के राजस्व को भारी नुकसान होने की आशंका है। नियमानुसार यदि यह निर्माण वैध प्रक्रिया के तहत होता, तो प्राधिकरण को शुल्क और अन्य मदों में बड़ी राशि प्राप्त होती। इसके बावजूद अधिकारियों की निष्क्रियता यह संकेत देती है कि या तो मामले को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है या फिर किसी दबाव में कार्रवाई रोकी जा रही है। जहां छोटे-छोटे निर्माणों पर जीडीए तत्काल बुलडोजर चलाता है, वहीं जयपुरिया मॉल जैसे बड़े मामलों में चुप्पी साध ली जाती है। यह दोहरी नीति गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। लगातार पत्राचार के बावजूद नहीं बदली स्थिति: संजय शर्मा का कहना है कि उन्होंने इस मामले में पत्राचार करना बंद नहीं किया है और लगातार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है। हर बार कार्रवाई का आश्वासन मिलता है, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं होता। बीती 30 अप्रैल 2026 को जन सहयोग संस्थान की तरफ से मुख्यमंत्री को इस संबंध में पत्र भेजा गया है और मांग की गई है कि जयपुरिया मॉल के गलियारों को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाए। बड़ा सवाल—आखिर जिम्मेदार कौन?: अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायतें जीडीए प्रवर्तन जोन-6 से लेकर शासन स्तर तक पहुंच चुकी हैं, निरीक्षण में अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं और ध्वस्तीकरण के आदेश भी जारी हो चुके हैं, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या यह महज लापरवाही है, या फिर सिस्टम के भीतर गहरी जड़ें जमा चुकी मिलीभगत? फिलहाल, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की चुप्पी और निष्क्रियता इस पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना रही है। जयपुरिया सनराइज मॉल का यह प्रकरण अब न केवल अवैध निर्माण का मामला रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की भी एक बड़ी परीक्षा बन चुका है।

गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित जयपुरिया
सनराइज प्लाजा मॉल में अवैध निर्माण और
कॉरीडोरों पर अतिक्रमण का मामला जीडीए
से लेकर शासन तक पहुंचने के बाद भी जस
का तस है। मॉल में कॉरीडोरों पर कब्जा कर
उन्हें दुकानों में बदलने और स्वीकृत
मानचित्र के विपरीत निर्माण की शिकायतें
हर बार ठंडे बस्ते में डाली जाती रही हैं। कई
बार शिकायत, निरीक्षण और ध्वस्तीकरण
के आदेश जारी होने के बावजूद जीडीए ने
जयपुरिया मॉल के खिलाफ कोई एक्शन
नहीं लिया है, इससे जाहिर होता है कि मॉल
में मानचित्र के विपरीत किया गया मनमाना
अवैध निर्माण और अतिक्रमण आपसी
मिलीभगत का नतीजा है। यह पूरा मामला
जीडीए अफसरों की दोहरी नीति को भी
उजागर करता है।

ब्लॉक एस. बी. में भूतल पर स्वीकृत मानचित्र के विरुद्ध निर्माण / गतिविधिया३शॉप नंबर 174 से लेकर शॉप नंबर 165 सी के सामने वाले पब्लिक कॉरीडोर को अनधिकृत रूप से मर्ज करके रेस्टोरेन्ट में तब्दील कर दिया गया है।
1 शॉप नंबर 127 से शॉप नंबर 166 सी के सामने वाले कॉरीडोर को अनधिकृत रूप से मर्ज करके पूरा हॉल आउटलेट
को दे दिया गया है।
2 शॉप नंबर 133बी से लेकर शॉप नंबर-138 के सामने वाले कॉरीडोर पर अनधिकृत रूप से कब्जा कर- के यूनियन
बैंक को दे दिया गया है।
3 शॉप नंबर 136 से लेकर शॉप नंबर – 132बी के सामने वाला कॉरीडोर अनधिकृत रूप से कब्जा/मर्ज करके आउलट
24७7 को दे दिया गया है।
4 इस तरह 4 कॉरीडोर ब्लॉक होने से मॉल के अंदर जाने वाले सभी रास्ते अवरूद्ध कर दिए हैं।
5 शॉप नंबर – 153 से लेकर शॉप नंबर-165 के सामने वाला करीब 10 फीट चौड़ा कॉरीडोर अनधिकृत रूप से
मर्ज करके बर्गर किंग को दिया गया है। यही नहीं, बर्गर किंग के पीछे बने टॉयलेट का एरिया छोटा कर के बर्गर को
ही दे दिया गया। इस तरह एक बड़ा क्षेत्रफल अनिधिकृत तरीके से बर्गर किंग को दिया गया है।
6 शॉप नंबर 125 से लेकर शॉप नंबर 140ए के बीच की मैन एन्ट्री जिसमें से स्टेयर केस नीचे जाता है, उसके ओपन
एरिया पर करीब 2000 फुट का पक्का लेंटर डालकर बेसमेन्ट का हिस्सा रिलायंस मार्ट को किराए पर दे दिया गया है।

ब्लॉक एस. ए. में भूतल पर स्वीकृत मानचित्र के विरुद्ध निर्माण/गतिविधियां
1 शॉप नंबर-47 से लेकर शॉप नंबर-53 के सामने तक का ओपन एरिया अवैध रूप से मर्ज करके श्रेया आई सेंटर
को किराए पर दे दिया।
2  इसी कारीडोर के आगे वले हिस्से को शॉप नंबर-38 से शॉप नंबर-45 तक कॉरीडोर को खत्म करके फैशन
फैक्ट्री में मर्ज करके किराए पर दे दिया है।

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