नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) के शहरों—नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद—में ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। शुक्रवार को एक बार फिर सुबह और शाम के व्यस्त समय (पीक आवर्स) के दौरान प्रमुख सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं, जिससे लाखों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, डीएनडी फ्लाईवे, और एनएच-24 (दिल्ली-गाजियाबाद मार्ग) पर ट्रैफिक का दबाव सबसे अधिक देखने को मिला। कई स्थानों पर वाहन रेंगते नजर आए, जिससे रोजाना ऑफिस आने-जाने वाले लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई। कुछ यात्रियों ने बताया कि जहां सामान्यतः 30 मिनट में तय होने वाला सफर आज डेढ़ घंटे तक खिंच गया। ट्रैफिक विशेषज्ञों के अनुसार, एनसीआर में वाहनों की तेजी से बढ़ती संख्या इस समस्या की सबसे बड़ी वजह है। पिछले कुछ वर्षों में निजी वाहनों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जबकि उसी अनुपात में सड़क और सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया है। इसके अलावा, कई स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्य, जैसे मेट्रो विस्तार, फ्लाईओवर निर्माण और सड़क मरम्मत, भी जाम की स्थिति को और बिगाड़ रहे हैं। शुक्रवार सुबह हल्की बारिश ने भी ट्रैफिक की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। गीली सड़कों और जगह-जगह जलभराव के कारण वाहन चालकों को धीमी गति से चलना पड़ा, जिससे जाम और लंबा हो गया। आईटीओ, आश्रम चौक, अक्षरधाम, सराय काले खां और राजीव चौक जैसे प्रमुख चौराहों पर स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और कई स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए गए हैं। साथ ही, लोगों को रियल-टाइम ट्रैफिक अपडेट देने के लिए सोशल मीडिया और मोबाइल ऐप्स का सहारा लिया जा रहा है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले ट्रैफिक की स्थिति की जानकारी जरूर लें और जहां तक संभव हो, मेट्रो, बस या कारपूलिंग जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करें। इस बीच, पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी ट्रैफिक जाम को बढ़ते प्रदूषण का एक बड़ा कारण बताया है। लंबे समय तक सड़कों पर खड़े रहने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को खराब करता है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ट्रैफिक जाम अब केवल एक असुविधा नहीं, बल्कि एक गंभीर शहरी समस्या बन चुका है। कई लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सड़कों के विस्तार पर जल्द ध्यान देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक की स्थिति और भी भयावह हो सकती है। फिलहाल, आम जनता को रोजाना इस समस्या से जूझना पड़ रहा है, जिससे उनकी उत्पादकता और जीवन की गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं।



