Noida News: जिले की पुलिस कमिश्नर आईपीएस लक्ष्मी सिंह के पिता और लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की हत्या के मामले में अदालत ने 23 साल बाद फैसला सुनाया है। विशेष सीबीआई अदालत ने आरोपियों पन्ना सिंह, विक्रम यादव उर्फ कालिया और बृजेश यादव को दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया। इस मामले में अदालत ने आगामी 7 जुलाई 2026 सजा की तारीख तय की है।
8 अगस्त 2002 को लखनऊ में हुई थी हत्या
आईपीएस लक्ष्मी सिंह के पिता की हत्या 8 अगस्त 2002 को लखनऊ के कैसरबाग इलाके में हुई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह कैसरबाग कचहरी से स्कूटर पर सवार होकर अपने घर लौट रहे थे। इस दौरान रास्ते में आरोपी विक्रम यादव उर्फ कालिया ने उनसे लिफ्ट मांगी। अधिवक्ता उसे स्कूटर पर बैठाकर आगे चले तो विक्रम ने कनपटी पर गोली मार दी। हत्या के संबंध में पत्नी नयनतारा ने कैसरबाग थाना में मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई की छानबीन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि वरिष्ठ अधिवक्ता की हत्या सुपारी (कॉन्ट्रेक्ट किलिंग) देकर कराई गई थी।
पूरी हत्या की साजिश मन्नालाल गुप्ता आदि ने रची
सीबीआई की जांच में सामने आया कि आईपीएस लक्ष्मी सिंह के पिता अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की हत्या की साजिश मुख्य रूप से मन्नालाल गुप्ता, विक्रम यादव उर्फ कालिया, वेद प्रकाश गुप्ता, पन्ना सिंह, बृजेश यादव उर्फ मुन्ना और छोटेलाल ने रची थी। केस के लंबे ट्रायल के दौरान मुख्य साजिशकर्ता मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश और छोटेलाल की मृत्यु हो गई है। शेष बचे तीन आरोपियों को विशेष सीबीआई न्यायाधीश वायु नंदन मिश्रा ने दोषी ठहराया।

