Ghaziabad News: कल यानी 20 अक्टूबर को त्रिग्रही एवं लुंबक योग में विजय मुहूर्त में दशहरा पूजन होगा। शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद के पंडित शिवकुमार शर्मा के अनुसार इस वर्ष दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। मंगलवार को श्रवण नक्षत्र होने के कारण लुंबक योग बन रहा है। तत्कालीन ग्रह गोचर में शुक्र बु़ध और सूर्य का त्रिग्रही योग है जो श्रेष्ठ है। 20 अक्टूबर को मध्यान्ह 12:50 बजे तक महानवमी तिथि रहेगी। 12:50 के बाद अपराह्न व्यापिनी दशमी तिथि श्रवण युक्त नक्षत्र से रहेगी। यद्यपि 21 अक्टूबर को भी अपराह्न व्यापिनी दशमी है लेकिन इस दिन श्रवण नक्षत्र का अभाव है। श्रवण युक्त नक्षत्र में दशहरा मनाने का शास्त्रीय उल्लेख है।
दशहरा पूजन का शुभ मुहूर्त
दशहरा पूजन के लिए 20 अक्टूबर को 12:54 बजे से 15:00 तक शुभ मुहूर्त रहेगा। इसमें भी 1: 33 बजे से 2:44 बजे तक विजय मुहूर्त में दशहरा पूजन सर्वोत्तम है। दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन शुभ माना जाता है और इस दिन अपराजिता और शमी वृक्ष की पूजा भी की जाती है।
दशहरा पूजन की विधि
सर्वप्रथम घर के आंगन में गाय के गोबर के 10 छोटे-छोटे उपले बनाकर आटे, हल्दी रंगोली बनाकर उसके ऊपर रखें। उसमें कुछ नौरते अर्थात उगे हुए जौ के पौधे लगा दें। उनके बीच में अपने खाता बहीं ,कंप्यूटर पुस्तक,शस्त्र आदि रखें ।उन सब पर कलावा बांधेऔर टीका लगाएं। घर के मुख्य व्यक्ति परिवार सहित पूर्व मुख बैठकर पुष्प चावल और जल लेकर मास तिथि , गोत्र नाम आदि से संकल्प करें। स्वस्तिवाचन, गणेश पूजन करने के पश्चात शक्ति के प्रतीक मां दुर्गा व भगवान श्री राम का ध्यान करें और उनके मंत्र बोले।
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।।
रामाय रामचंद्राय रामभद्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नमः।।
उसके पश्चात सभी लोग अपने हाथ में पुष्प और खील लेकर उन्हें बिखरते हुए तीन परिक्रमा करें और यह मंत्र बोले –
ओम् यानि कानि च पापानि, जन्मान्तर कृतानि च।
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणा पदे पदे।।
खील बताशे का प्रसाद वितरित करें।
इस दिन रावण दहन रात्रि 21:02 बजे 23:23 बजे तक कर सकते हैं।

