गाजियाबाद। इस बार गंगा दशहरा स्थान और निर्जला एकादशी शुद्ध पक्ष में 24 और 25 जून को मनाई जाएगी। ये जानकारी शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद के पंडित शिवकुमार शर्मा दे दी है।
17 मई से अधिमास का आरंभ
पंडित शिव शंकर के अनुसार 17 मई से अधिक मास आरंभ हो गया है। जो 15 जून तक रहेगा। अधिक मास में सूर्य की संक्रांति नहीं आती है इसलिए इसको अशुद्ध मास माना जाता है, यद्यपि भगवान कृष्ण ने अधिक मास को अपना नाम दिया है अर्थात पुरुषोत्तम मास। अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास में विशिष्ट पर्व,विवाह ,गृह प्रवेश आदि के मुहूर्त को छोड़कर अन्य सभी पूजा ,संस्कार दान, जाप आदि कार्य करने के लिए उत्तम होता है।
शुक्ल पक्ष में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी
ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी का मुख्य पर्व आता है। जैसा की शास्त्रों में वर्णित है कि प्रथम ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष और द्वितीय ज्येष्ठ मास का कृष्ण पक्ष मिला करके अधिक मास माना जाता है ।क्योंकि इसमें संक्रांति का अभाव होता है। इसीलिए कोई भी व्रत या पर्व इस अशुद्ध मास में नहीं हो सकते हैं।
यह शास्त्र विरुद्ध है
कुछ पंचांगों में अशुद्ध मास में दशहरा मनाने का आदेश दिया है। लेकिन यह शास्त्र विरुद्ध है। यदि ऐसा करेंगे तो फिर तो उसके अगले दिन निर्जला एकादशी भी का व्रत रखना चाहिए। लेकिन वह हो नहीं सकता क्योंकि अधिक मास की जो एकादशी विशेष रूप से होती है जिनका नाम है कमला पुरुषोत्तम एकादशी व्रत , जब यह पुरुषोत्तम मास की एकादशी हमने शास्त्रों में निश्चित कर दी गई है तो फिर निर्जला एकादशी व्रत शुद्ध पक्ष में क्यों होगा।
इसलिए किसी के बहकावे ना आए
शुद्ध मास द्वितीय ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी अर्थात गंगा दशहरा 24 जून का है और निर्जला एकादशी व्रत 25 जून को रखा जाएगा। दशहरे के दिन मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था इसलिए इस दिन गंगा स्नान करना बहुत शुभ होता है। हरिद्वार आदि तीर्थ स्थानों पर गंगा स्नान का बहुत महत्व है। जो भक्त गंगा जी नहीं जा सकते हो वे अपने घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल डालकर उसी का पुण्य लाभ ले सकते हैं। गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी को व्रत पर्व मनाने के साथ-साथ जलीय वस्तुओं का दान करें, पानी का घड़ा, पंखा शरबत, फल आदि का दान करने से बहुत ही पुण्य मिलता है।
जाने किस दिन होगा गंगा दशहरा स्नान और निर्जला एकादशी व्रत
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