गाजियाबाद। कैलास मानसरोवर भवन की देखरेख व संचालन की जिम्मेदारी जीडीए के पास है। जीडीए द्वारा नामित एजेंसी को मानसरोवर भवन में नियमानुसार व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करेगी, लेकिन कैलास मानसरोवर यात्रा के दौरान यहां आकर रूकने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह भवन आरक्षित रहेगा। यहां श्रद्धालुओं का जत्था अगले माह 15 जून से आना शुरू हो जाएगा। जो करीब एक हजार की संख्या में 50-50 के जत्थों में यहां पहुंचेंगे।
श्रद्धालुओं के पंजीकरण और खाने पीने की व्यवस्था
श्रद्धालुओं के पंजीकरण और स्वास्थ्य जांच के साथ ही रहने, खान-पान, पूजा-पाठ, भजन और परिवहन आदि की व्यवस्था एजेंसी के माध्यम से ही कराई जाएगी। शनिवार को जीडीए उपाध्यक्ष नन्द किशोर कलाल, सचिव विवेक मिश्र आदि ने पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने मानसरोवर भवन में श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं में मिली खामियों को दूर करने के निर्देश दिए।
धर्मार्थ कार्य निदेशालय ने जीडीए को हस्तांतरित किया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद धर्मार्थ कार्य निदेशालय ने इंदिरापुरम स्थित मानसरोवर भवन जीडीए को हस्तांतरित किया था। दोनों विभागों के बीच 30 साल के लिए अनुबंध किया गया है। भवन का रखरखाव और संचालन जीडीए की जिम्मेदारी है। अगले माह जून से कैलास मानसरोवर भवन में श्रद्धालुओं के जत्थे पहुंचना आरंभ होंगे। जीडीए उपाध्यक्ष नन्द किशोर कलाल ने प्राधिकरण अधिकारियों के साथ नामित एजेंसी के इंतजाम का निरीक्षण करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
132 करोड़ रुपये में निर्माण कराया
करीब आठ हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में फैले कैलाश मानसरोवर भवन का निर्माण धर्मार्थ निदेशालय द्वारा करीब 132 करोड़ रुपये में कराया गया है। इसमें बेसमेंट सहित कुल चार मंजिलें हैं, जिसमें रिहायशी और सुविधाजनक कमरे, पार्किंग, प्रशासनिक और सेवात्मक ब्लाक शामिल हैं।

