लखनऊ। जैसा की पहले से कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर होना मुश्किल है। ये कयास सही साबित हुआ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव छह महीने के लिए टाल दिए गए हैं। राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह माह के लिए बढ़ा दिया। पंचायती राज विभाग ने देर रात इस संबंध में आदेश जारी किया है।
आज खत्म हो रहा 57 हजार 694 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल
प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल आज 26 मई को खत्म हो रहा है। सरकार की तरफ से चुनाव प्रक्रिया पूरी न होने के कारण वर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासनिक व्यवस्था संभालेंगे। पहली बार प्रशासनिक समितियों के गठन की व्यवस्था लागू की जाएगी। ग्राम प्रधान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि चुनाव होने तक मौजूदा प्रधानों को कामकाज संभालने दिया जाए। सरकार ने इसी पर यह निर्णय लिया गया है।
आगामी विधानसभा चुनाव के बाद होंगे पंचायत चुनाव
माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव अब आगामी विधानसभा चुनावों के बाद कराए जाएंगे। यह भी कहा जा रहा है कि प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों के चलते पंचायत चुनावों की प्रक्रिया आगे के लिए टाल दी गई है।
ओबीसी आरक्षण आयोग का गठन
पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण तय करने के लिए योगी सरकार ने राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। सरकार की ओर से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम औतार सिंह आयोग के अध्यक्ष बनाए गए हैं। इसके अलावा सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, संतोष कुमार विश्वकर्मा और एसपी सिंह को सदस्य नियुक्त किया गया है।
आयोग को छह माह में देनी होगी रिपोर्ट
गठित आयोग को छह माह के भीतर पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण से संबंधित आंकड़ों का अध्ययन कर रिपोर्ट सरकार को देनी होगी। सरकार के निर्णय के बाद अब पंचायत चुनाव की प्रक्रिया और आरक्षण व्यवस्था को लेकर तैयारी तेज हुई है।
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टला, ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने बढ़ा
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