Ghaziabad News: इस बार शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं। इस बार शारदीय नवरात्र 10 दिन के होंगे। यानी देवी मां की पूजा करने का एक दिन अधिक मिलेगा। लेकिन इस बार कलश स्थापना के लिए केवल 48 मिनट का ही समय मिलेगा। शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य पं.शिवकुमार शर्मा ने बताया कि आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, 11 अक्टूबर, दिन रविवार से शारदीय नवरात्र आरंभ हो रहे हैं। रविवार को जब नवरात्र आरंभ होते हैं तो मां भगवती हाथी पर सवार होकर आती हैं। जो विश्व में शांति समृद्धि का प्रतीक होता है।
ये हैं शारदीय नवरात्रि की तिथियां।
11 अक्टूबर -प्रथम नवरात्र
12 अक्टूबर -द्वितीय नवरात्र
13 अक्टूबर -तृतीया नवरात्र
14 अक्टूबर -चतुर्थ नवरात्र
15 अक्टूबर- पंचम नवरात्र
16 अक्टूबर -षष्ठ नवरात्र
17 अक्टूबर- सप्तम नवरात्रि (सप्तमी का व्रत)
18 अक्टूबर-सप्तमी तिथि की वृद्धि
19 अक्टूबर – दुर्गाष्टमी (कंजक पूजन)
20 अक्टूबर -महानवमी एवं विजयदशमी
शारदीय नवरात्र में एक सप्तमी तिथि की वृद्धि
इस वर्ष सप्तमी तिथि की वृद्धि हो गई है। जो दो दिन रहेगी। 17 अक्टूबर को सप्तमी तिथि पूरे दिन रहेगी। उसी दिन सप्तमी का व्रत होगा। 18 अक्टूबर को 8:28 बजे से अष्टमी तिथि आएगी। जो अगले दिन 10:51 बजे तक रहेगी। इसलिए 18 अक्टूबर को सप्तमी तिथि वृद्धि को छोड़कर 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी को कंजक पूजन होगा।
नवमी पूजन और दशहरा 20 अक्टूबर को
20 अक्टूबर को 12:50 बजे तक नवमी है। मध्यान्ह तक महानवमी पूजन और नवरात्र समापन होगा। 12:50 बजे के बाद अपराह्न व्यापनी दशमी तिथि को विजय मुहूर्त में दशहरे का पूजन और रात्रि को रावण दहन होगा।
शारदीय नवरात्र घट स्थापना शुभ मुहूर्त के लिए केवल 48 मिनट
प्रतिपदा तिथि को चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में की हुई कलश स्थापना संतान और धन के लिए हानिकारक होता है।
रुद्रयामल का यह श्लोक इसका प्रमाण है।
‘वैधृतौ पुत्रनाशः स्याच्चित्रायां धननाशनम्’।
‘तस्मान्न स्थापयेत् कुम्भं चित्रायां वैधृतौ तथा’॥
अर्थात् वैधृति योग में कलश स्थापित करने से पुत्रनाश और चित्रा नक्षत्र में कलश स्थापित करने से धननाश का दोष बताया गया है। इसलिए सामान्यतः दोनों के रहते कलश-स्थापना करने का निर्देश नहीं है।
लेकिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण अपवाद आता है।
‘सम्पूर्णा प्रतिपद्देवि चित्रायुक्ता यदा भवेत्’।
‘वैधृत्या वापि युक्ता स्यात् तदा मध्यन्दिने रवौ॥’
‘अभिजित् तु मुहूर्तं यत्तत्र स्थापनमिष्यते।’
विभिन्न पंचांगों अनुसार कलश स्थपना का मुहूर्त
चित्रा नक्षत्र रात्रि 10:32 बजे तक है। वैधृति योग रात्रि 9:04 बजे तक है। प्रतिपदा तिथि लगभग रात्रि 9:32 बजे तक
तो 11 अक्टूबर को दिन में चित्रा और वैधृति दोनों चल रहे हैं।
ऊपर के विशेष श्लोक के अनुसार यहाँ अभिजित् मुहूर्त ही महत्वपूर्ण हो जाता है। अर्थात् 11 अक्टूबर 2026 को अभिजित् मुहूर्त में घटस्थापना करना शास्त्रीय और विशेष-विधान से समर्थित है।
क्योंकि प्रतिपदा तिथि,चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग रात्रि को 10:00 बजे के बाद समाप्त होगे ।उस समय रात्रि को घट स्थापना पूर्ण वर्जित है।
जैसे कि शास्त्रों में प्रमाण है।
‘न रात्रौ स्थापयेत् कुम्भं’
‘न च कुम्भाभिषेचनम्॥’
अर्थात् रात्रि में कलश-स्थापना और कुम्भाभिषेक न किया जाए।
इसलिए शास्त्र का नियम है
‘तदा मध्यन्दिने रवौ। अभिजित् तु मुहूर्तं… तत्र स्थापनमिष्यते।’”
उपरोक्त प्रमाण वाक्य के अनुसार ऐसी स्थिति में मध्याह्न काल में अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना की जाए। जो अत्यंत शुभ रहेगा
अर्थात रविवार को दिन में 11:36बजे से 12: 24 बजे तक अर्थात 48 मिनट तक कलश स्थापना उत्तम रहेगी। रविवार को कितने भी अशुभ योग हों। लेकिन अभिजीत मुहूर्त विशेष फलदाई होता है।

