उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश में सड़कों को अतिक्रमण मुक्त रखने और अवैध टैक्सी संचालन पर सख्त कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इन आदेशों का मकसद यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना, आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सरकारी परिवहन सेवाओं के राजस्व को बचाना है। इसके बावजूद दिल्ली से सटे गाजियाबाद में हालात इन निर्देशों के विपरीत नजर आते हैं। पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद उम्मीद थी कि ट्रैफिक प्रबंधन और कानून व्यवस्था में सुधार होगा, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। गाजियाबाद के लालकुआं लाईओवर को ही लीजिए,
यहां अवैध टैक्सियों का संचालन खुलेआम जारी है। लाईओवर के नीचे और ऊपर, दोनों ओर सड़कों पर प्राइवेट और कुछ कमर्शियल नंबर प्लेट वाले वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है। ये वाहन हापुड़, बुलंदशहर और अलीगढ़ जैसे शहरों के लिए सवारियां भरते हैं, जिससे यह पूरा इलाका एक अनधिकृत टैक्सी स्टैंड में तब्दील हो चुका है। इस अवैध गतिविधि का सबसे अधिक असर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) पर पड़ रहा है।
जहां रोडवेज की बसें यात्रियों के अभाव में खाली चलती दिखाई देती हैं, वहीं अवैध टैक्सियां अधिक किराए और त्वरित सेवा के नाम पर यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। इस स्थिति को और गंभीर बनाता है कार्रवाई के नाम पर होने वाला कथित दिखावा। सूत्रों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस द्वारा समय-समय पर चालान तो काटे जाते हैं, लेकिन ये कार्रवाई निष्पक्ष नहीं होती। आरोप है कि जिन वाहनों पर कार्रवाई की जाती है, उनका चयन भी तथाकथित ‘माफिया’ के इशारे पर होता है। यानी, जो वाहन इस अवैध नेटवर्क का हिस्सा नहीं होते या जिनसे कथित रूप से ‘सेटिंग’ नहीं होती, उन्हीं पर कार्रवाई कर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, जबकि असली संचालक बेखौफ होकर अपना काम जारी रखते हैं।लालकुआं क्षेत्र में यातायात पुलिस चौकी की मौजूदगी के बावजूद इस तरह की गतिविधियों का लगातार जारी रहना कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कई बार पुलिस और ट्रैफिक विभाग को लिखित शिकायतें दी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस और व्यापक कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। सूत्रों का कहना है कि यह पूरा गोरखधंधा प्रशासनिक उदासीनता और संभावित मिलीभगत के कारण फल-फूल रहा है। इसका खामियाजा आम जनता को ट्रैफिक जाम, असुरक्षित यात्रा और अव्यवस्थित यातायात के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
गंगा महिमा पत्रिका ने समय-समय पर इस खबर को प्रकाशित कर पुलिस प्रशासन को जागरूक करने का प्रयास भी किया मगर नतीजा शून्य ही रहा है। जनहित और सरकारी राजस्व की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि इस मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। साथ ही, अवैध टैक्सी संचालन के पूरे नेटवर्क की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि शासन के निदेर्शों का वास्तविक पालन
हो सके और आम जनता को राहत मिल सके।

